भारत के स्वतंत्रता संग्राम में सुभाष चंद्र बोस का स्थान अत्यंत विशिष्ट और निर्णायक है। वे उन क्रांतिकारी नेताओं में अग्रणी थे जिन्होंने केवल राजनीतिक संघर्ष ही नहीं किया, बल्कि सशस्त्र प्रतिरोध के माध्यम से भी अंग्रेज़ी साम्राज्यवाद को सीधी चुनौती दी। ‘नेताजी’ के नाम से विख्यात बोस असाधारण नेतृत्व क्षमता, ओजस्वी वक्तृत्व और अदम्य साहस के प्रतीक थे। उनका जीवन पूर्णतः राष्ट्र को समर्पित था।
प्रारंभिक राजनीतिक जीवन और कांग्रेस में भूमिका
सुभाष चंद्र बोस ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत देशबंधु चित्तरंजन दास के सान्निध्य में की। वे उनके निकट सहयोगी रहे और ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध आंदोलनों में सक्रिय भागीदारी के कारण उनके साथ जेल भी गए। जब सी.आर. दास को कोलकाता का मेयर चुना गया, तब उन्होंने बोस को नगर प्रशासन का मुख्य कार्यकारी अधिकारी नियुक्त किया। यह नियुक्ति बोस की प्रशासनिक दक्षता और संगठन क्षमता का प्रमाण थी।


